
भारत बना विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश
परिचय
- केंद्रीय कृषि मंत्री के अनुसार भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बनने की उपलब्धि हासिल की है।
- यह उपलब्धि भारतीय कृषि की बढ़ती उत्पादकता, उन्नत बीज तकनीक और किसानों के सतत प्रयासों को दर्शाती है।
- इसी क्रम में 25 फसलों के लिए उच्च उपज देने वाली 184 नई बीज किस्में भी जारी की गई हैं।
वैश्विक चावल उत्पादन में भारत की स्थिति
- भारत वर्तमान में लगभग 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ विश्व में पहले स्थान पर है।
- इसके बाद चीन, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, जापान, श्रीलंका और मिस्र प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल हैं।
- उत्पादन में यह बढ़त खाद्य सुरक्षा और कृषि निर्यात दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
भारत में राज्यवार चावल उत्पादन (2024–25)
- उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा चावल उत्पादक राज्य है, जहां से कुल उत्पादन का लगभग 13.8 प्रतिशत आता है।
- तेलंगाना लगभग 11.6 प्रतिशत योगदान के साथ दूसरे स्थान पर है।
- पश्चिम बंगाल से लगभग 10.6 प्रतिशत उत्पादन होता है।
- पंजाब का योगदान करीब 9.5 प्रतिशत है।
- छत्तीसगढ़ लगभग 7 प्रतिशत चावल उत्पादन में योगदान देता है।
चावल निर्यात में भारत की भूमिका
- भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है।
- वर्ष 2024–25 में भारत से लगभग 20.1 मिलियन मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया गया।
- भारतीय चावल के प्रमुख निर्यात गंतव्यों में सऊदी अरब, ईरान, इराक, बेनिन और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
- गुणवत्ता और विविध किस्मों के कारण भारतीय चावल की अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार बनी हुई है।
चावल फसल का महत्व
- चावल विश्व की प्रमुख खाद्य फसलों में से एक है।
- यह उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का मुख्य आहार है।
- भारत में चावल खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार और कृषि अर्थव्यवस्था का आधार है।
चावल की खेती के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां
- भारत में चावल की खेती 8° उत्तर से 30° उत्तर अक्षांश तक की जाती है।
- यह फसल समुद्र तल से लगभग 2,500 मीटर की ऊंचाई तक उगाई जा सकती है।
- गादयुक्त, दोमट और कंकड़युक्त मृदा चावल के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
- चावल अम्लीय और क्षारीय दोनों प्रकार की मृदा में उग सकता है।
- 5.5 से 6.5 pH वाली अपारगम्य उप-मृदा में इसकी उपज सर्वश्रेष्ठ होती है।
जलवायु और जल आवश्यकता
- चावल के लिए 100 से 150 सेमी तक की प्रचुर वर्षा आवश्यक होती है।
- उच्च आर्द्रता और गर्म जलवायु इसकी वृद्धि में सहायक होती है।
- दिन का औसत तापमान लगभग 30°C और रात का लगभग 20°C अनुकूल माना जाता है।
- चावल एक अर्ध-जलीय पौधा है, जिसे वृद्धि अवधि के अधिकांश समय 10–15 सेमी खड़े पानी की आवश्यकता होती है।
भारत में चावल के प्रमुख फसल मौसम
- अमन (शीतकालीन चावल)
- बुवाई जून–जुलाई के दौरान की जाती है।
- कटाई नवंबर–दिसंबर में होती है।
- औस (शरदकालीन चावल)
- बुवाई मई–जून में की जाती है।
- कटाई सितंबर–अक्टूबर में होती है।
- बोरो (ग्रीष्मकालीन चावल)
- खेती नवंबर से मई के बीच की जाती है।
- यह मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में उगाया जाता है जहां सर्दियों में नमी उपलब्ध रहती है।
निष्कर्ष
भारत का विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक बनना देश की कृषि क्षमता, वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों की मेहनत का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बढ़ता उत्पादन न केवल घरेलू खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका को भी मजबूत बनाता है। नई उच्च उपज वाली बीज किस्मों की शुरुआत से भविष्य में उत्पादकता और स्थिरता में और सुधार होने की संभावना है। विविध जलवायु और मृदा परिस्थितियों में चावल की सफल खेती भारत को कृषि के क्षेत्र में विशिष्ट बनाती है। कुल मिलाकर, यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।




