
बिहार की जलवायु
बिहार में आर्द्र उपोष्णकटिबंधीय जलवायु पाई जाती है। यह राज्य पूरी तरह से शीतोष्ण कटिबंध के उपोष्णकटिबंधीय भाग में स्थित है। सामान्यतः बिहार की जलवायु उपोष्णकटिबंधीय है, जहाँ ग्रीष्म ऋतु अत्यधिक गर्म तथा शीत ऋतु अपेक्षाकृत ठंडी होती है।
हालाँकि यहाँ उष्णकटिबंधीय और अत्यधिक आर्द्र महीने कम होते हैं, फिर भी अधिकांश समय मौसम गर्म बना रहता है। बिहार की जलवायु आर्द्र से अर्ध-आर्द्र या शुष्क प्रकृति की है। राज्य का पूर्वी भाग अपेक्षाकृत आर्द्र, जबकि पश्चिमी भाग अर्ध-आर्द्र अथवा शुष्क जलवायु वाला है।
वर्ष के कई महीनों में तापमान 25°C से ऊपर बना रहता है और कभी-कभी यह 29°C या उससे अधिक तक पहुँच जाता है।
पर्यटन की दृष्टि से अक्टूबर से अप्रैल का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस अवधि में वर्षा कम होती है।
बिहार की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक
बिहार की जलवायु निम्नलिखित प्रमुख कारकों से प्रभावित होती है:
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हिमालय के निकट स्थित होना
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कर्क रेखा के समीप होना
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बंगाल की खाड़ी से निकटता
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दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता
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उत्तर-पश्चिमी एवं ग्रीष्मकालीन हवाएँ
बिहार में ऋतुएँ
उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण बिहार में मुख्यतः तीन ऋतुएँ पाई जाती हैं:
1. ग्रीष्म ऋतु (मार्च से जून)
2. वर्षा ऋतु (जुलाई से अक्टूबर)
3. शीत ऋतु (नवंबर से फरवरी)
ग्रीष्म ऋतु (मार्च – जून)
ग्रीष्म ऋतु का आरंभ मार्च माह में होता है, जब अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) धीरे-धीरे कर्क रेखा की ओर बढ़ते हुए गंगा के मैदानों तक फैल जाता है। इसके कारण वायुदाब में कमी आती है और तापमान में तेज़ वृद्धि होती है।
इस अवधि में बिहार का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है और कई बार यह 45°C तक पहुँच जाता है, विशेषकर गया, जो राज्य का सबसे गर्म क्षेत्र माना जाता है।
अप्रैल, मई और जून के प्रारंभिक महीनों में बिहार के मैदानी इलाकों में “लू” नामक गर्म और शुष्क हवाएँ चलती हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं और कभी-कभी जनहानि भी होती है।
अप्रैल और मई में प्रायः दोपहर एवं शाम के समय गरज के साथ धूल भरे तूफान आते हैं, जिनसे हल्की वर्षा या कभी-कभी ओलावृष्टि होती है। इससे रबी फसलों, विशेषकर गेहूँ, को भारी नुकसान पहुँचता है।
वर्षा ऋतु (जुलाई – अक्टूबर)
बिहार की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 91% भाग वर्षा ऋतु में ही प्राप्त होता है, जो मुख्यतः जून, जुलाई और अगस्त महीनों में केंद्रित रहती है।
जून के मध्य में ITCZ पूरी तरह से गंगा के मैदानों पर स्थापित हो जाता है और दक्षिण-पश्चिम मानसून को सक्रिय करता है। बिहार को मानसून की दोनों शाखाओं से वर्षा प्राप्त होती है:
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बंगाल की खाड़ी की दक्षिण-पश्चिमी मानसून शाखा
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अरब सागर की दक्षिण-पश्चिम मानसून शाखा
इस ऋतु में बिहार में धान की खेती की जाती है, जो पूर्णतः मानसून पर निर्भर होती है।
राज्य के उत्तरी भाग में लगभग हर वर्ष अच्छी वर्षा होती है, किंतु नेपाल से आने वाली नदियों (विशेषकर कोशी) के कारण यहाँ प्रायः बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे व्यापक जन-धन की हानि होती है।
दूसरी ओर, दक्षिणी बिहार में मानसून अत्यंत अनियमित रहता है और यहाँ हर दो से तीन वर्ष में सूखे की स्थिति देखी जाती है।
वर्षा ऋतु में बाढ़ और सूखे के साथ-साथ मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड जैसी बीमारियों का भी प्रकोप बढ़ जाता है।
बरसात के मौसम में औसत वर्षा (मिमी में)
| महीना | वर्षा (मिमी) |
|---|---|
| जून | 185.5 |
| जुलाई | 340.0 |
| अगस्त | 259.0 |
लौटता मानसून (सितंबर – नवंबर)
अगस्त के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है और वापस लौटने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस दौरान वर्षा अत्यंत कम या नगण्य होती है।
मानसून की वापसी सामान्यतः नवंबर की शुरुआत तक पूरी हो जाती है। सितंबर, अक्टूबर और नवंबर के प्रारंभ में कम वर्षा होने से धीरे-धीरे शीत ऋतु का आगमन होता है।
जुलाई-अगस्त में औसत तापमान लगभग 34°C रहता है, जो अक्टूबर के अंत तक घटकर 25°C से 30°C के बीच आ जाता है।
शीत ऋतु / शरद ऋतु (नवंबर – फरवरी)
ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु की समाप्ति के बाद भूमि की सतह ठंडी होने लगती है, जिससे तापमान में गिरावट आती है और शीत ऋतु की शुरुआत होती है।
इस दौरान दिन छोटे और रातें लंबी व ठंडी हो जाती हैं। तापमान में सर्वाधिक गिरावट दिसंबर और जनवरी महीनों में देखी जाती है।
नवंबर में तापमान लगभग 19.4°C से 22.2°C के बीच रहता है, जबकि जनवरी में यह घटकर 10.5°C से 7°C तक पहुँच जाता है।
उत्तर-पश्चिमी बिहार में स्थित शिवालिक पर्वतमाला के क्षेत्रों में जनवरी माह में पाला पड़ता है, जिससे विशेष रूप से आलू की फसल को नुकसान होता है।
जनवरी और फरवरी में उत्तर-पश्चिमी विक्षोभों के प्रभाव से हल्की वर्षा होती है, जो वार्षिक वर्षा का लगभग 5% से 10% होती है और रबी फसलों के लिए लाभकारी सिद्ध होती है।




