
प्रगति (PRAGATI) प्लेटफॉर्म की 50वीं बैठक: भारत के सुशासन (Governance) में कैसे आया क्रांतिकारी बदलाव?
हाल ही में प्रगति (PRAGATI) प्लेटफॉर्म की 50वीं बैठक आयोजित की गई, जो भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर है। साल 2015 में शुरू किया गया यह प्लेटफॉर्म आज ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘गुड गवर्नेंस’ का सबसे सशक्त उदाहरण बन चुका है।
आइए जानते हैं कि कैसे PRAGATI (Pro-Active Governance And Timely Implementation) ने सरकारी कामकाज की सुस्ती को खत्म कर पारदर्शिता और जवाबदेही तय की है।
प्रगति (PRAGATI) प्लेटफॉर्म क्या है? (What is PRAGATI?)
प्रगति एक बहु-उद्देशीय और मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म है जिसका संचालन सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार के विभिन्न स्तरों (केंद्र और राज्य) के बीच समन्वय स्थापित करना और लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करना है।
प्रगति (PRAGATI) के 3 मुख्य उद्देश्य
- लंबित परियोजनाओं को गति देना: उन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा (Infrastructure) परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना जो प्रशासनिक बाधाओं के कारण रुकी हुई हैं।
- जन शिकायतों का निवारण: विभिन्न विभागों में नागरिकों की शिकायतों (Grievances) का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना।
- योजनाओं की प्रभावी निगरानी: ऐसी कल्याणकारी योजनाओं के परिणामों में सुधार करना जो जमीन पर बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं।
PRAGATI प्लेटफॉर्म की प्रमुख विशेषताएं
इस प्लेटफॉर्म की सफलता के पीछे कुछ तकनीकी और रणनीतिक कारण हैं:
- ‘टीम इंडिया’ की भावना: प्रगति समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता प्रधान मंत्री द्वारा की जाती है। इस बैठक में राज्यों के और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ प्रत्यक्ष संवाद होता है।
- तकनीकी एकीकरण: यह प्लेटफॉर्म पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti), परिवेश (PARIVESH) और अन्य पोर्टल के डेटा का उपयोग करता है।
- वैश्विक पहचान: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने इसे “सत्य का एकल स्रोत” (Single Source of Truth) करार दिया है, जो वास्तविक समय (Real-time) में प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग के लिए एक ग्लोबल बेंचमार्क है।
प्रगति (PRAGATI) की बड़ी उपलब्धियां और प्रभाव
प्रगति ने भारतीय कार्यसंस्कृति में “सहकारी संघवाद” (Cooperative Federalism) को बढ़ावा दिया है। इसके कुछ प्रमुख आंकड़े और सफलता की कहानियां नीचे दी गई हैं:
1. 94% समस्याओं का त्वरित समाधान
इस प्लेटफॉर्म के जरिए अब तक पहचानी गई लगभग 94% बाधाओं को दूर किया गया है। इससे न केवल परियोजनाओं की लागत कम हुई है, बल्कि उनके पूरा होने में लगने वाला समय भी घटा है।
2. दशकों से लंबित प्रोजेक्ट्स हुए पूरे
- कश्मीर रेल लिंक: 1994 में शुरू हुई जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना को प्रगति के हस्तक्षेप के बाद 2025 में चालू किया गया।
- बोगीबील ब्रिज: ब्रह्मपुत्र नदी पर बना भारत का सबसे लंबा रेल-सह-सड़क पुल।
- नवी मुंबई एयरपोर्ट: हवाई अड्डे के निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर कर काम में तेजी लाई गई।
निष्कर्ष: डिजिटल गवर्नेंस की नई दिशा
प्रगति (PRAGATI) प्लेटफॉर्म ने यह साबित कर दिया है कि बेहतर तकनीक और मजबूत नेतृत्व के साथ सरकारी तंत्र को भी कॉर्पोरेट जैसी गति दी जा सकती है। यह प्लेटफॉर्म न केवल परियोजनाओं को पूरा कर रहा है, बल्कि आम नागरिक का सरकार पर भरोसा भी बढ़ा रहा है।




