
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के बारे में:
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) भारत सरकार की एक प्रमुख मातृत्व लाभ योजना है, जिसका उद्देश्य गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। वर्ष 2017 में प्रारंभ की गई यह योजना हाल ही में अपने 9 वर्ष पूर्ण कर चुकी है।
योजना की पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को गर्भावस्था के दौरान होने वाली वेतन-हानि की आंशिक भरपाई, सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने तथा मातृ एवं शिशु कुपोषण को कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। वर्ष 2022 में इसे ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत सम्मिलित कर दिया गया, जो महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तीकरण हेतु एक अम्ब्रेला योजना है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के बारे में
- शुरुआत: वर्ष 2017
- प्रकार: केंद्र प्रायोजित योजना
- कार्यान्वयन मंत्रालय: केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
- विलय: वर्ष 2022 में मिशन शक्ति में सम्मिलित
- नोट: ( मिशन शक्ति महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तीकरण के लिए एक अम्ब्रेला योजना है।)
पात्र लाभार्थी
यह योजना मुख्य रूप से अनौपचारिक एवं असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए है।
- कम-से-कम 19 वर्ष की आयु की गर्भवती महिलाएं
- पहली बार जीवित बच्चे को जन्म देने वाली स्तनपान कराने वाली माताएं (PW&LM)
- वे महिलाएं जो किसी अन्य समान मातृत्व लाभ योजना का लाभ नहीं ले रही हों
योजना के अंतर्गत लाभ
1. प्रथम जीवित संतान के लिए सहायता
- कुल ₹5,000 की राशि
- यह राशि तीन किस्तों में सशर्त प्रदान की जाती है:
- गर्भावस्था का शीघ्र पंजीकरण
- कम-से-कम एक प्रसवपूर्व जांच
- बच्चे का पंजीकरण एवं प्रथम टीकाकरण
2. जननी सुरक्षा योजना (JSY) से संबद्ध लाभ
- संस्थागत प्रसव के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन
- इस प्रकार एक महिला को औसतन ₹6,000 तक की सहायता प्राप्त होती है
3. बालिका प्रोत्साहन (PMMVY 2.0)
- दूसरी संतान यदि बालिका हो, तो एकमुश्त ₹6,000 का प्रोत्साहन
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के उद्देश्य
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार
- गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान कुपोषण को कम करना
- गर्भावस्था के समय होने वाली वेतन-हानि की आंशिक भरपाई
- संस्थागत प्रसव और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना
- गर्भावस्था, पोषण और बाल टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना
योजना का महत्व
- मातृ स्वास्थ्य में सुधार: PMMVY गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को बेहतर पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रदान करती है।
- मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी: संस्थागत प्रसव और नियमित जांच को प्रोत्साहित कर यह योजना अप्रत्यक्ष रूप से मृत्यु दर को कम करती है।
- आर्थिक सुरक्षा: वेतन-हानि की भरपाई से महिलाओं को गर्भावस्था और प्रसव के बाद पर्याप्त आराम मिल पाता है।
- सामाजिक समानता: ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को वित्तीय सहायता देकर सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम करती है।
- सतत विकास लक्ष्यों से जुड़ाव: यह योजना SDG-3 (अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण) और SDG-5 (लैंगिक समानता) के लक्ष्यों के अनुरूप है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की कमियां
- दूसरी संतान पर प्रतिबंध (बालिका को छोड़कर)
- ग्रामीण क्षेत्रों में कम जागरूकता और सीमित पहुंच
- लंबी एवं जटिल दस्तावेज़ीकरण प्रक्रिया
- ₹5,000 की राशि कई बार अपर्याप्त सिद्ध होती है
- भुगतान में देरी और कार्यान्वयन में समन्वय की कमी
- निगरानी एवं मूल्यांकन तंत्र का अभाव
आगे की राह
योजना की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए:
- दूसरी एवं उसके बाद की संतान के लिए सहायता का विस्तार
- वित्तीय सहायता की राशि में वृद्धि
- दस्तावेज़ीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना
- निगरानी और जागरूकता तंत्र को मजबूत करना
- ग्रामीण एवं हाशिए पर रहने वाले समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना एक स्वस्थ समाज की नींव रखने में सहायक है। इसकी कमियों को दूर कर इसे और अधिक समावेशी एवं प्रभावी बनाया जा सकता है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के राष्ट्रीय लक्ष्यों को बेहतर ढंग से प्राप्त किया जा सके।




